Sad Shayari कसमे वादों का क्या करूँ

sad shayari kasme wadoon ka kya

कसमे वादों का क्या करूँ

जहाँ अलग है हमारे

फिर न तुझे मुझे आबाद करने की चाहत है कोई

न मुझे तुझे बर्बाद करने की हसरत है कोई ||

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