Meraj Sami

  • hindi poems mukammal kitab hun

    Hindi Poems मुक्कमल किताब हूँ

    मुक्कमल किताब हूँ

    तेरी ही अल्फ़ाज़ हूँ

    अधूरा सा खुआब हूँ

    पर लाजवाब हूँ

    सपनो में जो आई थी

    बस जरा सा मुस्कुराई थी

    ये देख दिल खुशगवार हुआ

    फिर मिलने का जिंदगी भर इंतज़ार हुआ

    बे इख़्तेयार प्यार हुआ

    न मेरा इज़हार हुआ

    न उसका इंकार हुआ

    फिर महबूब मेराज हुआ

    सारी मोहब्बत एक राज़ हुआ

    फिर ये मुकम्मल किताब हुआ ||

    Written by:-

    Meraj Ibn Sami

Choose A Format
Story
Formatted Text with Embeds and Visuals